Monthly Archives: October 2011

सब कुछ ट्विट्टर पर हो जाता तो ब्लॉग की जरूरत ही क्या थी.

बातें घुमड़ती रहती हैं सब अंदर ही अंदर लगता है कान के परदे फट जायेंगे जिसे ना पढ़ा जाए वह यहाँ आया ही क्योंकर? दो लफ़्ज़ों में कुछ बयाँ ना हो पाए- मुझसे तो बिलकुल नहीं. फिर जल्दी भी क्यों?

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